प्रेम भी इच्छा ही है, वो बहुत ऊँचे स्तर की इच्छा है। प्रेम नहीं आया, इच्छा ही कम कर ली तो मुर्दा हो गए।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, भोग को लेके मैं थोड़ा समझ नहीं पाया हूँ। ये एक इच्छा अंदर बनी रहती है भोगने की। भोगने के बाद ये शायद कम होती है, लेकिन कुछ टाइम बाद फिर उतनी हो जाती है। ये इच्छा तो बनी ही रहेगी या जा भी सकती है?
आचार्य प्रशांत: नहीं, वो तभी जाएगी न जब पूरी हो जाएगी। इच्छा का मतलब है कि भीतर कुछ कमी है।
प्रश्नकर्ता: कुछ कमी है।
आचार्य प्रशांत: उस कमी को पूरा करने के लिए एक इच्छा आती है।
प्रश्नकर्ता: हाँ जी।
आचार्य प्रशांत: उसमें न बीच में एक डिस्कनेक्ट होता है, इतना तो पता होता है भीतर कमी है। कमी न होती तो इच्छा नहीं आती, लेकिन इच्छा सिर्फ़ ये नहीं बोलती कि कमी है, इच्छा ज्ञानी बनती है। ये


