प्रकृति और पुरुष क्या हैं? मन धन में क्या ढूँढता है? || आचार्य प्रशांत (2019)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रकृति और पुरुष को समझाने की कृपा करें।
आचार्य प्रशांत: पुरुष-प्रकृति की जो अवधारणा है, मूलतः वो सांख्य योग से आयी है। लेकिन जिस तरीके से ‘पुरुष' शब्द का प्रयोग फिर आध्यात्मिक साहित्य में हुआ है, वो आवश्यक नहीं है कि सांख्य योग के अनुसार ही हो। तो ‘पुरुष’ शब्द का प्रयोग दो तरीके से हुआ है – कभी-कभी तो अविनाशी, अक्षर, अचल आत्मा को पुरुष कह दिया गया है, और कभी पराप्रकृति को ही पुरुष कह दिया गया है। तो एक पुरुष तो वो है जो अद्वैत आत्मा है – इस अर्थ में भी ‘पुरुष’ शब्द का प्रयोग हुआ है। और दूसरा पुरुष वो है जो प्रकृति के द्वैत का ही दूसरा पक्ष है।
ये दूसरा पुरुष कौनसा है, समझाए देता हूँ। आत्मा के विषय में तो ना कुछ बोलने की ज़रूरत है, ना बोला जा सकता है। ये दूसरा पुरुष कौनसा है, समझना! कृष्ण कहते हैं भगवद्गीता में, कहते हैं कि ‘जिसको तुम पुरुष समझते हो, वो भी प्रकृति-मात्र ही है, बस वो पराप्रकृति है। जिसे तुम साधारणतया प्रकृति कहते हो, वो अपराप्रकृति है।‘ तो प्रकृति माने क्या? ये सबकुछ जो दिखाई पड़ता है, इसे कहते हो न प्रकृति? तो जो प्रकृति को देखे सो पुरुष, जिसे प्रकृति दिखाई पड़ती हो वो पुरुष। अब जिसे प्रकृति दिखाई पड़ती है – ग़ौर से समझना – वास्तव में वो भी प्रकृति ही है। मुझे बताना, प्रकृति के अलावा किसी को प्रकृति दिखाई पड़ सकती है क्या?
प्र: नहीं।
आचार्य: लेकिन प्रकृति के भी वास्तव में दो हिस्से हैं – एक वो जो दृष्टा है, और दूसरा वो जो दृश्य है। कभी-कभी ऐसा भी किया जाता है कि दृश्य-भर को कह दिया जाता है ‘प्रकृति’ और दृष्टा को कह दिया जाता है ‘पुरुष’। इसी बात को कृष्ण ने गीता में साफ़ भी करा है, उन्होंने कहा है, 'ना! जो दिखाई दे रहा है वो तो प्रकृति है ही, जो देख रहा है वो भी प्रकृति ही है।‘ ये जो दूसरी प्रकृति है, जिसको वो कह रहे हैं ‘पराप्रकृति’, इसको ही ‘पुरुष’ भी कह दिया जाता है। तो ये पुरुष आत्मा नहीं है, ये पुरुष अकर्ता नहीं है; ये पुरुष प्रकृति का ही एक रूप है, और इसीलिए ये प्रकृति के साथ उलझ जाता है। भई, प्रकृति के साथ प्रकृति ही तो उलझेगी न? तो बात ज़ाहिर है, कि वो पुरुष जो प्रकृति से उलझ जाता है बार-बार, वो भी प्रकृति ही है।

![क्या आप आचार्य प्रशांत की गीता कम्यूनिटी [इस सदी का एक अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग] के भाग हैं?](https://cimg.acharyaprashant.org/images/img-3dc72262-a991-4f45-a9d4-a0397e21022c/30/image.jpg)



