भारतीय सेना को पाकिस्तान को घुटनों पर लाने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा। जो ज़ुल्म और अंधेरे के पक्ष में ही खड़ा हो गया है, वह और ताक़तवर न हो जाए — इस उद्देश्य से युद्ध करना उचित होता है। पर भारत-पाकिस्तान का एक Conventional War भी 500 करोड़ का हो सकता है। एक Rafale 2,500 करोड़ का आता है। युद्ध शुरू करना भी एक गणित है — पता होना चाहिए कि कब शुरू करना है और यह भी पता होना चाहिए कि अब कहाँ पर जाकर हमारे उद्देश्यों की पूर्ति हो गई है।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, भारत-पाकिस्तान के बीच में युद्ध छिड़ चुका है। लगातार स्थितियाँ खराब हो ही रही हैं। आम जनता में आक्रोश है और कहीं ना कहीं सब ये चाह ही रहे हैं कि युद्ध शुरू हुआ है तो ये एक्सट्रीम तक ही जाए। क्या होगा अगर ये एक फुल ब्लोन वॉर में तब्दील हो जाएगा और अगले 15-20 दिन या अगले कुछ महीनों तक ऐसी स्थिति बनी रहेगी।
आचार्य प्रशांत: आज भी आए थे मीडिया वाले इसी मुद्दे पर बात करने। देखो निर्दोषों पर अन्याय ना हो, जो जुल्म और अंधेरे के पक्ष में ही खड़ा हो गया है वो और ताकतवर ना हो जाए, इस उद्देश्य से युद्ध करना ठीक होता है — वो एक बात है। गीता का उदाहरण मैं देता हूँ बार-बार, कि श्री कृष्ण युद्ध वर्जित तो नहीं कर रहे हैं ना? वह तो स्वयं बोल रहे हैं — युद्धस्व लड़ो। वो धर्म युद्ध है और धर्म युद्ध करा जाता है ताकि पूरी दुनिया में सत्य की, शांति की, समता की, न्याय की स्थापना हो सके।
है वो युद्ध ही पर उसका उद्देश्य क्या होता है? ये साफ समझो। कि जब कोई और तरीका नहीं बचेगा तब दुनिया में सच्चाई को और ऊँचाई को स्थापित करने के लिए हम लड़ाई जरूर करेंगे। हम पीठ नहीं दिखाएँगे। अर्जुन तो पीठ दिखाना चाहते थे। श्री कृष्ण ने कहा नहीं, नहीं, नहीं, कुछ नहीं लड़ना तो पड़ेगा। वहाँ उद्देश्य क्या है? — वहाँ उद्देश्य ये है कि,भई कोई व्यक्तिगत मेरा अहंकार नहीं है।




