प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आज ओशो की किताब पढ़ रहे थे। उसमें ओशो बोलते हैं कि आपमें मैं जो ज्ञान का बीज डाल रहा हूँ, आपका शरीर ख़त्म हो जाएगा लेकिन यह बीज कभी ख़त्म नहीं होगा क्योंकि यह बीज अमर है, कभी-न-कभी तो इसको उपजना ही है।
तो क्या शरीर के मरने के बाद भी यह जो ज्ञान है और यह जो समझ है, कहीं आगे के जन्मों में भी होता है इसका कुछ?
आचार्य प्रशांत: शरीर के मरने के बाद ज्ञान नहीं रह जाता। कुछ नहीं रह जाता है, उसी ‘कुछ नहीं’ का नाम शान्ति है न! तुम शान्त कब होते हो, जब दिमाग में क्या चल रहा होता है?
प्र: कुछ नहीं।
आचार्य: कुछ नहीं। और शरीर के जाने के बाद भी क्या बचता है?
प्र: कुछ नहीं।
आचार्य: कुछ नहीं। तो शान्ति का ही दूसरा नाम क्या है?
प्र: कुछ नहीं।




