प्रश्न: आचार्य जी, माँसाहार और शाकाहार भोजन क्या होता है? इसको थोड़ा समझा दीजिए।
आचार्य प्रशांत जी: ‘*नॉन वेजीटेरियन*‘ (माँसाहार) कोई फ़ूड (भोजन) नहीं होता, किसी का माँस होता है।
‘*नॉन वेजीटेरियन*‘ भोजन होता ही नहीं, वो किसी का शरीर है। उसको ‘फ़ूड (भोजन)’ आप तभी बोल सकते हैं जब आपने कभी किसी जीव से, किसी प्राणी से मोहब्बत की ही न हो। नहीं तो आप ये कह ही नहीं पाएँगे – “‘*नॉन वेजीटेरियन फ़ूड*‘ (माँसाहार भोजन)।”
फ़िर आप सीधे कहेंगे, “फ़्लैश (माँस)।”
एक तो ये शब्द बड़े धोखेबाज़ी का है – ‘*नॉन वेजीटेरियन फ़ूड*‘।
‘*नॉन वेजीटेरियन*‘ क्यों बोल रहे हो? सीधे ‘ऐनिमल फ़्लैश (जीव-माँस)’ क्यों नहीं बोलते?- “आई एम ए ऐनिमल फ़्लैश ईटर (मैं जीव-माँस भोक्ता हूँ)।” क्योंकि ऐसे बोलोगे तो तुम्हारी बर्बरता, तुम्हारी क्रूरता, तुम्हारी नृशंसता साफ़ दिख जाएगी। कोई पूछे, “क्या खाते हो?” तुम कहोगे, “आई ईट ऐनिमल फ़्लैश (मैं जानवर का माँस खाता हूँ)।” साफ़ दिख जाएगा कि कितने बर्बर हो तुम।
तो तुम बात को ज़रा सभ्य तरीक़े से बोलते हो, कहते हो, “*नॉन वेजीटेरियन।*” तो फ़िर वेजीटेरियन फ़ूड




