वक्ता:
मन को मिरतक देखि के, मति माने विश्वाससाधु तहाँ लौं भय करे, जो लौं पिंजर साँस।।
माया के बड़े से बड़े छलावों में यह है कि ‘मैं नहीं हूँ’। सबसे बड़ा भ्रम यह है कि भ्रम नहीं है, सबसे बड़ा बंधन यह है कि बंधन नहीं है। यूँ हीं नहीं कहा है कबीर ने, ‘माया महा ठगनी हम जानी’। ऐसे ही ठगती है वो कि मैं हूँ हीं नहीं, मैं हूँ हीं नहीं। जो भी तुम्हें प्रतीत हो रहा है, सब सच है, यही तरीका है माया के ठगने का। नहीं, आकर्षण नहीं है, प्रेम है। नहीं कल्पना नहीं है, तथ्य हैं। नहीं भय नहीं है, करुणा है। नहीं बेड़ियां नहीं हैं, आभूषण हैं।
यदि भ्रम दिख हीं जाये कि भ्रम है तो बहुत समय तक चल नहीं सकता। यदि बेड़ियां दिख हीं जायें कि बेड़ियां हैं तो कोई बंधा क्यों रहेगा, यदि मूर्खता दिख ही जाये कि मूर्खता है, तो बुद्ध हीं बुद्ध होंगे। यदि अधर्म दिख ही जाये कि अधर्म है, तो संसार धार्मिक हो जायेगा। कभी-कभी दिखने भी लगता है। ऐसे भी क्षण आते हैं जब अचानक से दिख जाता है। अनायास ही आते हैं, हमारे करे नहीं आते हैं, बस यूँ ही। किसी की अनुकम्पा है, आ गए या कोई संयोग हुआ आ गए, और तब पूरी व्यर्थता सामने नग्न खड़ी होती है। सब दिखाई दे रहा है कि यह तो सब फालतू ही था, व्यर्थ था। मेरे तरीके कहीं के नहीं हैं, अनर्थक। यह सब दिख जाता है और दिखने के बाद फिर गायब हो जाता है। यह दिख जाता है, आप उस दिखने, आप उस रोशनी पर दो-चार कदम चल भी लेते हो और आपको यह आभास होने लगता है कि दिशा बदल गयी, रोशनी दिखाई दी, हम देख पाये, हमने अपनी दिशा बदल ली और अब हम कहीं और को ही जा रहे हैं। बड़ा सुख मिलता है मन को इस कल्पना से। सुख ही नहीं मिलता, गर्व भी होता है।
‘पहले हम भटके हुए थे, अब हम सही राह पर हैं। पहले हम बंधन में थे अब हमें रोशनी मिली, हमने बेड़ियां तोड़ डालीं। पहले मन बेक़ाबू रहता था, अब नहीं है। पहले हम हिंसा और घृणा से भरे हुए थे, अब तो हम प्रेम पुंज हैं। मेरे जीवन में बदलाव आ गया है, बड़ी क्रांति आ गयी है, सूर्योदय हो गया है। मेरी सारी वासनाएँ मर गयी हैं, मेरे सारे भ्रम मिट गए हैं, सारे जाले साफ़ हो गए हैं’ और जब आप माया के मरने का उत्सव मना रहे होते हैं, माया बगल में खड़े होकर हंस रही होती है। जब आप कह रहे होते हैं कि मैं तो मुक्ति का गीत गा रहा हूँ, आपको पता भी नहीं होता हैं कि उस गीत के लफ़्ज़ किसने लिखे हैं। जब आप कह रहे होते हैं कि मुझे जीवन में सच्चा प्रेम मिल गया और आप अपने प्रेमी से आलिंगन -बध्य होते हैं, आपको पता भी नहीं होता है कि आपने किसको गले रखा है; माया हीं माया है। जब बंधन में रखें तब माया है और जब मुक्ति प्रतीत हो तो और बड़ी माया है। उसके अतिरिक्त कुछ नहीं है। जब आप कष्ट में ज़ार-ज़ार रोये, माया है और जब आप गहरे सुख का अनुभव करें तो और बड़ी माया है। वो अपने सबसे घातक पैतरे उनके लिए बचा कर रखती है, जो उससे भागना चाहते हैं। वो सबसे ज़्यादा उन्हीं को उलझाती है, जो सुलझने की कोशिश में लगे होते हैं। सबसे ज्यादा उन्हें हीं पकड़ती है जिनको भागने की बड़ी इच्छा हो रहीं होती है।




