मैंने पूछा डूबते हुए सूरज से
तुम्हें देख वह पक्षी क्यों घर लौटता है ?
मैंने पूछा उड़ते हुए पक्षी से
क्यों तुम व्यर्थ गगन गुंजाते हो?
मैंने पूछा विस्तृत श्याम गगन से
क्यों तुम मेघों के पीछे मुँह छुपाते हो ?
पूछा मैंने मेघों से
क्यों तुम धरती पर छाये-छाये जाते हो ?
धरती से पूछा- बोलो तुम
क्यों बोझ मेरा उठाती हो




