कर्म छू नहीं सकता शब्द से भी पाएगा कौन, राम तक पहुँचेगा मन होकर मात्र मौन

हाथ सुमरनी पेट कतरनी, पढ़त भागवत गीता ।
राम भजा सो जीता जग में, राम भजा सो जीता ।।
संत कबीर
वक्ता: पढ़ने में और भजने में क्या अंतर है?
श्रोता१: भजा तभी जा सकता है जब उस चीज़ को समझ सको।
श्रोता२: भजा मतलब एक पूरी मौजूदगी इन्वॉलव्ड है।
वक्ता: वो क्या होती है?
श्रोता२: मलतब कि ह्रदय इन्वॉलव्ड होना चाहिए।
वक्ता: कैसे पता आपको कि ह्रदय






