समय तब कम पड़ता है, जब वह बेकार चीज़ों में जा रहा हो। मैनेजमेंट का एक सिद्धांत है — व्हाट इज़ इम्पॉर्टेंट, मस्ट बी मेज़र्ड। अगर आप वक़्त को क़ीमती मानते हो, तो उसे मेज़र करना सीखो। जब तक आप समय को साफ़-साफ़ नहीं नापोगे, तब तक यह नहीं जान पाओगे कि समय बर्बाद कहाँ हो रहा है। समय जहाँ-जहाँ बच सकता है, बचाओ। यदि उसे बर्बाद होने से बचा लिया, तो 24 घंटे में अच्छे कामों को करने के लिए समय की कोई कमी नहीं होगी।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मेरा नाम मधुर है। मैं बीएससी फिज़िक्स ओनर का फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट हूँ। आचार्य जी, जैसे मैंने कॉलेज ज्वाइन किया तो मैंने अपने आप को कई विषयों से घिरा हुआ पाया। मैं समझ नहीं पा रहा था कि कैसे इनको टैकल करूँ और किस तरीक़े से इनको वरियता दूँ। तो आचार्य जी मेरा सवाल है कि किस मूल बात को केंद्र में रखकर मैं विषयों को वरियता दूँ, ताकि अपनी कॉलेज की ज़िन्दगी का मैं सबसे उच्चतम इस्तेमाल कर सकूँ।
आचार्य प्रशांत: कैसे विषय? कौन सी चीज़ें हैं जो कॉलेज में आ गई हैं और उसमें तुम वरियता नहीं दे पा रहे हो, माने प्रायोरिटाइज़ नहीं कर पा रहे हो। उदाहरण दो।
प्रश्नकर्ता: जैसे सर सोसाइटीज़ में पार्टिसिपेट करना या किसी कंपटीशन में पार्टिसिपेट करना, तो उसमें सर मैं कन्फ्यूज़ हो जाता हूँ कि किस में करूँ या किसको छोड़ूँ किसको ज़्यादा वरियता दूँ।




