जो चाहा था वो मिला नहीं - एक टीस रह गई है || आचार्य प्रशांत, आर.डी.वी.वी. के साथ (2023)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर। सर, ज़िंदगी में कुछ चीज़ों का मलाल तो रह जाता है जो नहीं मिलती है। हर चीज़ नहीं मिलती है। तो ये उठा-पटक क्यों? मतलब जैसी चल रही है वैसी चलने देते है। उसमें क्या दिक्क़त है? ये सही भी है, ऐसा भी कर सकते है।
आचार्य प्रशांत: मुझे थोड़े ही दिक्क़त है। आपको दिक्क़त है। तो बताइए क्यों है दिक्क़त, क्यों है मलाल?
प्र: मलाल तो मतलब, हर चीज़ मिलती नहीं है तो मलाल रह ही जाता है। तो फिर ज़रूरी नहीं है कि हर चीज़ पा ही लिया जाए। किसी-न-किसी चीज़ का मलाल तो रह ही जाता है।
आचार्य: हर चीज़ क्या पाने लायक़ होती है? जो चीज़ पाने लायक़ हो और न मिले, मैं कह रहा हूँ बेशक उसका क्षोभ होना चाहिए, भीतर उसकी तड़प होनी चाहिए। लेकिन जो चीज़ें आपको नहीं मिलीं, क्या सचमुच वो पाने लायक़ थीं भी?
प्र: तो फिर ये उठा-पटक होती है न, आचार्य जी, कि मलाल रह जाता है कि..
आचार्य: वो मलाल इसीलिए रह जाता है क्योंकि जो चीज़ सचमुच पाने लायक़ है वो आपको अभी मिली नहीं है। जब वो मिल जाएगी तो ये सब जो छोटी-छोटी चीज़ें हैं जो आपने पायी नहीं वो आपको मज़ाक की बात लगेंगी फिर; मज़ाक की बात।
अच्छा, उदहारण देता हूँ आपको एक। आप रात में उठे हैं। आप दिनभर थककर के आये थे और आप शाम को ही सो गये। आप सात बजे सो गये क्योंकि आज दिनभर आपने बहुत मेहनत करी थी। सात बजे नींद आ गई। घर आये सात बजे, सो गये। आपकी नींद खुली साढ़े दस बजे और अब आपको लग रही है भूख। दिनभर मेहनत करी थी, सो गये थे, अब लग रही है भूख। ठीक? और अब आप बाहर निकलते हैं सड़क पर और आपको पता है कि इस वक़्त तक तो जितने होटल,





