अध्यात्म वहाँ भी बहुत ज़रूरी है, ताकि तुम्हें पता चले कि अगर तुमने विक्टिम होने को अपनी पहचान बना लिया, तो तुम अपनी ज़िंदगी ख़राब कर रहे हो। तो इसलिए अध्यात्म सबके लिए ज़रूरी है। उनके लिए भी, जिनको हम प्रिविलेज्ड क्लास कहते हैं। उनके लिए भी, जो ऑप्रेस्ड रहे हैं और जिनमें अब हीन भावना, इन्फ़िरिऑरिटी आ गई है। और उनके लिए भी, जो अब रेडिकलाइज़ हो रहे हैं, अपने आप को विक्टिम बोलते हैं और अब अग्रेसिव होना चाहते हैं। अध्यात्म उनके लिए भी बहुत ज़रूरी है। अध्यात्म सबके लिए बहुत ज़रूरी है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
अंकित त्यागी: नमस्कार, स्वागत है आपका NDTV पर इस विशेष पेशकश में। मेरे साथ दार्शनिक, बेस्ट सेलिंग राइटर और आईआईटी-आईआईएम के पढ़े हुए दार्शनिक कहूँ अगर मैं, आचार्य प्रशांत जी इस वक़्त हमारे साथ जुड़ रहे हैं। उनकी कुछ किताबों पर हम बात कर रहे थे एक उन्होंने ये किताब लिखी है, “जात अजात की क्या जात?” इंटरेस्टिंग किताब है सर ये, और उस समय भी हम इस किताब के बारे में बात कर रहे थे जब अभी-अभी देश में एक बड़ा फैसला सरकार ने लिया है, कि जातिगत जनगणना सरकार कराएगी जब सेंसेस होगा।
विपक्ष ने बड़े दिनों से इसके लिए माँग की थी, कुछ राज्यों में सर्वे भी हुए। मैं आपका इस पर थोड़ा समझना चाहता हूँ, आपका क्या विचार है? इससे, जो हम भारत में बात करते हैं कि बड़ी विकट समस्या है, जाति के आधार पर लोगों को बाँटने की, उसको और बढ़ावा मिलेगा या इससे निजात पाने का प्रयास होगा? जिसे बिल्कुल कहा जा रहा है कि कोशिश ये की जाएगी कि लोगों को समझने के बाद उनके लिए और बेहतर स्कीम्स बनाई जा सकें। तो क्या जाति को इससे और बढ़ावा मिलेगा? विभाजन और बढ़ेगा या इसे एक मेडिसिन के तौर पर आप देख रहे हैं?
आचार्य प्रशांत:




