पुरानी कबीलाई रवायतें और इस्लामिक दर्शन — ये दोनों बातें आपस में गुथ गई हैं। बहुत सारी चीज़ें, जिनको आम मुसलमान मज़हब समझता है, वो वास्तव में बस अरब की प्रथाएँ हैं। धर्म के नाम पर जो चल रहा है, वो हज़ारों-लाखों लोगों की मौत बन रहा है। इसके प्रतिरोध में पूरी दुनिया कट्टर होती जा रही है। संसद, न्यायालय, कार्यालय, शैक्षिक संस्थाएँ — हर जगह से मुसलमान नदारद है। इस पिछड़ेपन का कारण अशिक्षा और ग़रीबी है। इसे दूर करने के लिए ज्ञान का प्रकाश चाहिए — विज्ञान, इतिहास, तर्क में शिक्षा चाहिए।
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प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। आचार्य जी, जैसे आप जानते हैं कि मेरा बैकग्राउंड मुसलमान है, इस्लामिक बैकग्राउंड है। तो ये हाल ही के जो आतंकवादी अटैक्स हुए हैं इसने मुझे बहुत ज़्यादा क्रोधित कर दिया अंदर से। क्योंकि यही वजह थी जिसकी वजह से मैंने इस्लामिक स्क्रिप्चर को क्वेश्चन करना शुरू किया था। जबकि मैं ख़ुद एक स्टूडेंट रह चुकी हूँ। बहुत कम उम्र से मैं एक स्टूडेंट रही थी, एक दाई थी और बड़े-बड़े आपके इंडियन जितने इस्लामिक गुरु हैं सबके नीचे मैं पढ़ चुकी हूँ।
बट जब मैंने देखा ये अटैक जो है मुसलमानों, जो ख़ुद को मुसलमान कहते हैं वो अटैक कर रहे हैं और उस पे जो आक्रोश होना चाहिए मुसलमानों का और जो बदलाव आना चाहिए वो जब नहीं दिखा मुझे, खासतौर पर जो बड़े लेवल पर जो लोग बैठे हुए हैं; वो जब नहीं दिखा तो फिर मैं तो क्वेश्चन करने लगी क्वेश्चन भी करने लगी और पुरानी-पुरानी मान्यताओं को मैं छोड़ने लगी।




