तुम्हारे पास जिंदगी में अपने लिए कोई अच्छा काम क्यों नहीं है? वो तुम्हारा काम देखने आ रहे हैं क्या? तो तुम्हारे पास फालतू समय क्यों है कि तुम उनका काम देख रहे हो? देखो मैं मना नहीं कर रहा हूं अच्छी किताबें पढ़ने से, अच्छी मूवीज देखने से। पर बहुत लोग जो ऐसा करते हैं ना कि हम तो अच्छी-अच्छी चीजें देखा और पढ़ा करते हैं। मैं कह रहा हूं वो भी अपना समय बर्बाद ही कर रहे हैं। ये क्या अच्छी-अच्छी चीजें देखा करते हैं, पढ़ा करते हैं।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मेरा नाम मयंक है मैं एक स्टूडेंट हूं। सर इमोशंस जब आते हैं जैसे एक डाइट कर रहा है कोई इंसान, कोई इंसान डाइट कर रहा है और कोई खुशबू आई फिर उसको पता है, कि वो जा के खाएगा और इस बात पे वो हंस रहा है। लेकिन अब मैंने डिसाइड कर लिया कि मैं एक काम करने वाला हूं। और मेरे सामने फोन रखा हुआ है। और फोन पे नोटिफिकेशन आ रही है। मुझे पता है कि मैं अभी जाके खोलने वाला हूं। खोलने के बाद पहली शॉट आएगी। शॉट देखने के बाद मेरा हाथ अपने आप जाएगा। दूसरी शॉट तक मैं अवेयर होता हूं कि मैं देख पा रहा हूं कि हां, मैं नेक्स्ट शॉट यहां पे रुक सकता हूं या फिर नहीं रुक सकता हूं। थोड़ी सी होती है मेरे पास चॉइस।
लेकिन जैसे ही तीसरी, चौथी पता ही नहीं चलता तीसरी - 30 कब निकल गई। वहां पर भी चॉइस ऑलमोस्ट चली जाती है। फिर वहां से एक गिल्ट भी आता है कि क्यों इतना टाइम वेस्ट कर दिया। फिर उसके बाद मतलब फ्रस्ट्रेशन बहुत ज्यादा आती है, कि काम भी नहीं हुआ और इतना टाइम भी खराब हो गया। इसका कुछ निकला भी नहीं। और इससे




