हमारे बच्चों पर हमला हो रहा है, और हम बेख़बर हैं || आचार्य प्रशांत (2019)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मेरी छः वर्ष की बेटी है। जो विद्यमान औपचारिक शिक्षा व्यवस्था है, उससे तो उसको भाषा की, विज्ञान की, गणित की, संसार की शिक्षा मिल ही जाएगी। ये भी समझ में आता है कि उस औपचारिक, सांसारिक शिक्षा के समानांतर, साथ-साथ, पैरेलल जीवन-शिक्षा भी देनी ज़रूरी है बल्कि शायद वो जीवन-शिक्षा हमारी औपचारिक शिक्षा से कहीं ज़्यादा आवश्यक है।
लेकिन अपनी बेटी को सही शिक्षा दे पाऊँ, इससे पहले तो मुझे ख़ुद सही रूप में शिक्षित होना पड़ेगा न! पिछले एक महीने से आपके वीडियोज़ यूट्यूब के माध्यम से सुन रहा हूँ और अब शिविर में भी आ गया हूँ। कृपया मुझे ये समझाएँ कि आपके वीडियोज़ देखने और शिविर में आने के अलावा वो क्या तरीक़ा है जिससे मैं वो सही शिक्षा प्राप्त कर सकता हूँ और उसको वो शिक्षा उसे कैसे दे सकता हूँ?
आचार्य प्रशांत: सबसे पहले तो बच्चे तक पहुँचने वाले विकृत शिक्षा के जितने रास्ते हैं, दरवाज़े-खिड़कियाँ हैं, उनकी पहचान कर-करके उनको बंद करना पड़ेगा।
ये बताने से पहले कि बच्चे को सही जीवन शिक्षा और उच्चतर जीवन मूल्य कैसे दिए जाएँ, मैं ये बताना ज़रूरी समझता हूँ कि उसको जो गलत शिक्षा मिलती है और निकृष्ट जीवन मूल्य मिलते हैं, उनको रोकना, उनको अवरुद्ध करना, उनका रास्ता ब्लॉक करना ज़्यादा ज़रूरी है।
दोहराए देता हूँ क्योंकि बहुत सारे यहाँ पर अभिभावक बैठे हैं। आप बच्चे को उचित और ऊँचे जीवन मूल्य सिखाएँ, वो आवश्यक है लेकिन उससे पहले तत्काल, आकस्मिक, इमरजेंसी ज़रूरत इस बात की है कि बच्चे तक जो विकृत मूल्य और कुशिक्षा पहुँच रही है, उसको रोकें।



