प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक सवाल बहुत सारे जो वीगनवाद (करुण शाकाहारी) का समर्थन करते हैं, ये वीगन शब्द या वीगनिज़्म बोलते हुए डर जाते हैं, शरमा जाते हैं, उसको कुछ और तरीक़े से बोलते हैं। सो ये लोग जो हैं जिसको शायद कप केक, कप केक वीगन्स जो कहते हैं कि तो क्या हमें जब यह हम प्रचार कर रहे हैं, हमें डरना चाहिए? क्या हमें कुछ अच्छा दूसरा शब्द इस्तेमाल करना चाहिए? कि शुड बी वी अनअपालजेटिक एंड से इट (क्या हमें क्षमाप्रार्थी नहीं होना चाहिए और ये कहना चाहिए)?
आचार्य प्रशांत: डरना तो कभी भी नहीं चाहिए तो इसमें कैसे डर सकते हैं। हाँ, शब्द ज़रूर शायद भारतीय संदर्भ में शुद्ध शाकाहार बोल दीजिए। निर्विद्याहार भी बोलते हैं पर बहुत भारी हो जाता है। शुद्ध शाकाहार अच्छा है। शाकाहारी तो होते ही हैं भारत में सभी होते हैं। शुद्ध शाकाहारी और अच्छा है। इससे यह और साबित हो जाता है न कि वो अशुद्ध शाकाहारी हैं वो तो है ही। वीगनिज़्म थोड़ा सा लगता है जैसे कोई वेस्टर्न फैड (पाश्चात्य शैली) है।
प्र: पर ये शुद्ध शाकाहार जो हुआ यह कि जितने सारे होटल हैं वेजिटेरियन वो सब शुद्ध शाकाहार ही लिखते हैं, प्योर वेजिटेरियन। सो ये प्योर वेजिटेरियन उस कैटेगरी (श्रेणी) में चले जाता है कि हम तो प्योर ही हैं हम वही खाते हैं जाकर।
आचार्य: नहीं, तो शुद्ध शाकाहार जो बात है उसको साफ़ अर्थ देना पड़ेगा फिर। मैं समझता हूँ ज़्यादा, ज़्यादा फ़ायदे की बात हो सकती है बिलकुल ठीक कहा आपने। लोग अपनेआप को शुद्ध शाकाहारी इस अर्थ में बोलते हैं कि हम माँसाहारी नहीं हैं तो हम शुद्ध हैं। शाकाहारी होने भर से हम शुद्ध हो गए।
वो ये नहीं मानते कि शाकाहार भी दो तरह का हो सकता है: एक शुद्ध और एक अशुद्ध। जिसमें तुमने दूध डाल दिया वो अशुद्ध हो गया क्योंकि दूध कहाँ से शाक हो गया भाई। दूध कौन सा शाक है; वो तो अशुद्ध ही है न।


![क्या आप आचार्य प्रशांत की गीता कम्यूनिटी [इस सदी का एक अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग] के भाग हैं?](https://cimg.acharyaprashant.org/images/img-3dc72262-a991-4f45-a9d4-a0397e21022c/30/image.jpg)


