दमन क्या है? साधना में दमन आवश्यक क्यों? || तत्वबोध पर (2019)

दमः कः? चक्षुरादि बाह्योइंद्रिय निग्रहः।
दम क्या है? चक्षु आदि बाह्य इंद्रियों का निग्रह करना ही दम है।
—तत्वबोध, श्लोक ५.४
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आप भी अकसर नियंत्रण और दमन की बात करते हैं, तो तत्वबोध में दम की जो परिभाषा दी गई है, वह उससे क्या भिन्न है?
आचार्य प्रशांत: नहीं, भिन्न नहीं है। दमन का मतलब ही है प्रकृतिगत वृत्तियों का विरोध और फिर निग्रह, और मैं बिलकुल साफ़ कह रहा हूँ – विरोध।
तुम्हारी प्रकृति में, तुम्हारी देह में, तुम्हारे मस्तिष्क में बहुत कुछ ऐसा है—सभी कुछ ऐसा है—जो सिर्फ़ प्रकृति के उद्देश्यों की पूर्ति करना चाहता है, उसका तुम्हारी मुक्ति से कोई संबंध नहीं है। तुम्हारी देह में सब कुछ जो बैठा है, उसके अपने अलग इरादे हैं और वो सारे अलग इरादे एक ही दिशा के हैं – खाओ, पियो, सोओ और बच्चे पैदा करो।
छोटा-सा बच्चा होता है, देखना उसकी आँखें भी किसी चमकीली चीज़ की ओर कैसे चली जाती हैं। कोई पशु भी होता है, कोई कुत्ता, देखना कोई मादा पशु होता है तो वह तुरंत उसकी ओर कैसे आकर्षित हो जाता है।



