प्रश्नकर्ता: आचार्य जी नमस्कार। २०१८ का आपका एक वीडियो देखा था जिसमें आप अहम् की बात कर रहे थे और आपने बोला था कि अहम् से छुटकारा पाने के लिए कुछ विधियाँ हैं और साधना करनी होती है।
और एक टाइम में जब आप उसके लिए होता है कि आपको उससे निकलना है तो आपको वो सत्य ही बता देता है, आपको वो सत्य ही बता देता है कि तेरे को क्या करना हैआगे वो ख़ुद ही एक आपको रास्ता दिखा देता है।
तो क्या ये भक्तियोग में भी होता है। (प्रश्नकर्ता बहुत भावुक हो जाते हैं।) क्योंकि मैं बीस साल से भक्तियोग में हूँ मैंने अभी नारायण की पूजा की है। मुझे उनसे ज़्यादा प्रिय और कोई नहीं है। न अपने पेरेंट्स से। मैं ये नहीं कह रही कि मेरे पेरेंट्स(अभिभावक), मेरे इनलॉज(ससुराल), मेरे हस्बैंड(पति), मेरा बच्चा एवरीवन इज सपोर्टिव(मेरा बच्चा, पति सभी सहायक हैं)। आई गॉट एवरीथिंग इन लाइफ़(मैंने अपनी ज़िंदगी में सबकुछ पाया)। बट स्टिल(लेकिन फिर भी) मैं उससे प्रेम करती हूँ जो कि मेरा अभी तक है।
बट वो भक्तियोग में कुछ सालों में मुझे ऐसा एक्स्पीरीअन्स(अनुभव) हुआ पाँच-छह सालों में कि व्हाटएवर आई आस्क हिम आई गेट दी आंसर(जो कुछ भी मैंने उनसे पूछा मुझे उत्तर मिला)। और ये मेरी लाइफ में बड़े-बड़े इवेंट(घटना) हुए हैं मुझे नहीं पता कोई बिलीव(विश्वास) करेगा इस बात में नहीं करेगा। बट(पर) मुझे पहले ही पता चल गया था कि मेरी बेटी कब हो जाएगी
उन्होंने मुझे मतलब आई डोंट नो(मैं नहीं जानती)। मैं मेडिटेशन(ध्यान) करती हूँ या मैं सुबह पूजा में बैठ जाती हूँ क्या है। बट मुझे वो लाइफ के सारे इवेंट मुझे पहले ही पता चलने लगे गए थे पाँच-छह साल में ही हुआ है जब मैं बीस साल कि थी तब से मैंने भक्तियोग में आ गई थी। तो मेरा कहने का मतलब ये है कि अभी मैं भक्तियोग में हूँ और भक्तियोग से अब क्या हुआ कि मैं द्वैत सिद्धांत में विश्वास करती थी और अभी भी करती हूँ।










