11 लोगों की जानें गई हैं, और टीम में भी 11 ही लोग होते हैं। टीम के 11 लोग जान देने को तैयार होंगे? उनसे कहा जाए कि, “साहब, 1 लाख फैन बच जाएँगे अगर आप में से एक खिलाड़ी जान दे दे,” — वह तब भी न तैयार हो जान देने को। तुमको ये दुनिया समझ में नहीं आ रही है। यहाँ तुम्हें जो दिखाया, सुनाया जा रहा है — पर्दे के पीछे उससे बिल्कुल विपरीत चल रहा है। जिसकी जो भी छवि तुम्हारे सामने आ रही है, वो एक बनावटी छवि है, ताकि तुम्हारा शोषण होता रहे। वो प्लेयर्स नहीं हैं, वो परफ़ॉर्मर्स हैं, और तुम परफॉर्मेंस को ट्रुथ समझ रहे हो।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आज बेंगलूरु में लगभग 11 लोगों की मौत हो गई है सुबह, क्योंकि वो किसी टीम के फैन थे। और लगभग दिन में ये घटना हुई और शाम को सेलिब्रेशन होना था स्टेडियम में, तो वो सेलिब्रेशन रुका नहीं। तो मैं भी क्रिकेट फैन हूँ मुझे भी पसंद है क्रिकेट खेलना, देखना। पर मैं ये नहीं समझ पा रहा हूँ कि ये सिर्फ़ बात क्रिकेट की नहीं है, हर जगह की है। हमारा सेलिब्रेशन नहीं रुकता, सर। अपनी निजी ज़िन्दगी से लेके सब तरह की, सब तरफ़ यही देख रहा हूँ कि जब भी हमें कुछ थोड़ा भी वक़्त मिलता है हम सेलिब्रेट कर लेते हैं कुछ।
अभी आपने बताया जैसे कि — अभी जो अमीर-गरीब का कर्व है, वो के-कर्व का है। अमीर, अमीर होते जा रहे हैं। गरीब, गरीब होते जा रहे हैं। जलवायु का वही हाल है। तो कभी-कभी जब देखता हूँ तो असहाय लगता है। फिर भूल जाता हूँ।
आचार्य प्रशांत: तुम्हारा सेलिब्रेशन इसलिए लगातार चलता है क्योंकि तुम्हारा क्रंदन लगातार चलता है। तुम लगातार रो रहे हो, इसलिए तुम्हें लगातार हँसने की ज़रूरत है। तुम लगातार नर्क जैसी ज़िन्दगी जी रहे हो, इसलिए फिर तुम्हें बीच-बीच में अप्सराएँ नचानी पड़ती हैं कि तुम्हें लगे कि स्वर्ग में हो शायद।




