बल सत्य से आता है। जब आपको सत्य पता ही नहीं तो आप में बल कहाँ से आएगा? आपको किसी ने बोल दिया 'धर्म हिंसा तथैव च।' आपने कहा, 'हो सकता है लिखा होगा।' आपको किसी ने बोल दिया गाँधी जी बहुत अच्छे आदमी थे, राष्ट्रपिता थे। आपने मान लिया। आज आपको बोला जा रहा गाँधी जी और नेहरू से ज़्यादा बुरा कोई नहीं था, इन्होंने देश बर्बाद करा। आपने वो भी मान लिया। तो थाली के बैंगन हैं, जो जिधर को लुढ़काना चाहे लुढ़का सकता है।
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प्रश्नकर्ता: अभी जो हम बात कर रहे थे कि हिंसक लोगों के विरोध में जो शांत लोग नहीं बात कर रहे हैं, तो उनको हम ऐसे समझें कि वो कायर हैं या उनमें आत्मबल की कमी है?
आचार्य प्रशांत: देखो, बल सत्य से आता है। जब आपको सत्य पता ही नहीं तो आप में बल कहाँ से आएगा? आपको किसी ने बोल दिया 'धर्म हिंसा तथैव च।' आपने कहा, 'हो सकता है लिखा होगा।' आपको किसी ने बोल दिया गाँधी जी बहुत अच्छे आदमी थे, राष्ट्रपिता थे। आपने मान लिया। आज आपको बोला जा रहा गाँधी जी और नेहरू से ज़्यादा बुरा कोई नहीं था, इन्होंने देश बर्बाद करा। आपने वो भी मान लिया।
तो थाली के बैंगन हैं, जो जिधर को लुढ़काना चाहे लुढ़का सकता है। गाँधी जी और नेहरू दोनों बड़े लेखक भी थे। किसने पढ़ा गाँधी जी को और किसने पढ़ा नेहरू को? आपने पढ़ा है क्या? चूँकि आपने पढ़ा नहीं इसलिए आप जानते भी नहीं गाँधी जी कौन हैं। गाँधी जी के बारे में कोई दो-चार फ़िल्मी गाने सुन लिए। बोले ये गाँधी हैं। या कोई फ़िल्म देख ली गाँधी के बारे में तो यही तो गाँधी हैं। इतने ही तो गाँधी हैं।
अब एक व्यक्ति है जिसे राष्ट्रपिता कहा जा रहा है तो आपके भीतर यह थोड़ी जिज्ञासा नहीं उठी कि ऐसे कैसे किसी व्यक्ति को राष्ट्रपिता कह दिया। उसमें कुछ खूबी थी भी कि नहीं थी? क्या वो इस सम्मान का अधिकारी था?




