प्रश्नकर्ता: जब हम यह ॐ मंत्रोच्चारण करते हैं तो इससे हमें क्या लाभ होता है?
आचार्य प्रशांत: कुछ याद आता है।
प्र: कई बार मैं जब ॐ का मंत्रोच्चारण करती हूँ सुबह उठ कर; योग के छोटे से हिस्से के रूप में, तो वो मुझे शांति नहीं देता, मुझे ऐसा लगता है यह बस एक काम की तरह है।
आचार्य: वो तो फिर आप जब उसको समझ ही नहीं रही हैं तो क्या शांति मिलेगी।
प्र: फिर मैं क्या करूँ?
आचार्य: समझिए! ॐ को स्मरण रखने का मतलब होता है बहुत कुछ को विस्मरण करना। ॐ को याद रखने का मतलब होता है बहुत सारी बातों को भुलाना। ॐ को याद रखा माने क्या याद रखा? यह याद रखा कि ये जितना कुछ विविधता से भरा हुआ विस्तार है, ये वास्तव में बस 'अ', 'उ' और 'म' है। मुझे दिख रही हैं एक-लाख चीज़ें वो एक-लाख चीज़ें है ही नहीं; वो सब 'अ' है। मुझे आ रहें हैं सौ तरह के सपने, वो सौ विविध तरीकों के हैं ही नहीं; वो सब 'उ' हैं।
जिसको ये दिख गया, अब वो हज़ार चीज़ों और पचास सपनों के फेर में नहीं पड़ेगा। और यही ॐ का उद्देश्य है।




