अस्ति है समाप्ति,शून्यता है अनंतता || आचार्य प्रशांत, लाओत्सु पर (2015)

वक्ता: वैन हर वर्क इज़ डन, शी फॉरगेट्स इट।
डैट्स वाय इट लास्ट्स फॉरएवर।।
~ लाओत्सू
जब भी कुछ होगा उसकी हस्ती हमेशा मिटेगी। कर्म फ़ल का सिद्धांत यह तो कहता ही है कि तुम्हें कर्मफ़ल भुगतना पड़ेगा, साथ ही यह भी कहता है कोई कर्म फ़ल स्थायी नहीं होता। कर्म बदलते रहते हैं और उनके साथ में कर्मो के फ़ल भी बदलते रहते हैं। तुम आज जो कर रहे हो वो समय में आगे बढ़ता है तुम यदि समय में बने हुए हो तो तुम उसका फ़ल ग्रहण करोगे और ग्रहण कर के तुम एक नया कर्म पैदा करोगे जिसका फ़ल समय में आगे चला जाएगा। तो कर्म फ़ल लगातार बदलता रहता है। लाव त्जू कह रहे हैं –
वैन हर वर्क इज़ डन, शी फॉरगेट्स इट।
डैट्स वाय इट लास्ट्स फॉरएवर।।
यदि कर्म फ़ल होगा तो वो लगातार बना रहेगा। बना इस तरह से रहेगा कि बदलता रहेगा। आज कुछ है, कल कुछ और होगा, परसों कुछ और होगा। इस दुनिया में जिस भी चीज़ का अस्तित्व है, उस अस्तित्व की सीमा भी है समय में। वो अनंत नहीं हो सकता। अगर कहा जा रहा है कि ‘इट लास्ट्स फॉरएवर’ तो इशारा सिर्फ़ एक ही तरफ हो सकता है कुछ ना होने की तरफ़। जो है वो तो समाप्त होकर रहेगा। हस्ती यदि है किसी भी चीज़ की तो, हस्ती मिट कर रहेगी- यह दुनिया का नीयम है। यदि हस्ती नहीं मिटती तो उसका अर्थ इतना ही है कि वो चीज़ है नहीं।



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