अपने रास्ते की बाधा तुम खुद हो || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)

प्रश्नकर्ता: सवाल है कि नया काम मैं कोई शुरू ही नहीं कर पाता।
आचार्य प्रशांत: बात तुमने ठीक से समझी नहीं हर चीज़ की शुरुआत दुनिया में हर पल ही करनी होती है अगर जीवन प्रतिपल नया है तो उसमें प्रतिपल शुरुआत भी नई ही होगी। तो सवाल यह मत पूछो कि मैं कुछ नया शुरू क्यों नहीं कर पाता क्योंकि जब तुम यह कहते हो कि मेरी दिक्कत बस इतनी सी है कि शुरू नहीं कर पाता तो तुम्हारा आशय यह है कि एक बार शुरू कर लूँगा तो बात आगे होती जाएगी अपने आप। शुरुआत होने की देर है फिर बात अपने आप बढ़ती जाएगी। नहीं। वहाँ पर निरंतरता आ जाएगी। नहीं, निरंतरता नहीं है। तुम्हें क्या लगता है कि मैंने तुम्हें जवाब देना शुरू कर दिया तो उसमें जवाब देना ही काफ़ी है? मुझे हर पल सतर्कता के साथ बोलना है क्योंकि हर शब्द नया हैI जितना महत्व शुरुआत का है उतना ही महत्व हर आने वाले शब्द का भी है या मैं ये कहूँ कि मैंने शुरुआत अच्छी कर दी है आगे अपने आप हो जाएगा। क्या मैं कह सकता हूँ कि शुरुआत अच्छी कर दी है और आगे अपने आप हो जाएगा?
नहीं।
तो समस्या यह नहीं है कि मैं शुरुआत नहीं कर पाया। समस्या यह है कि काम हो ही नहीं पाता, जब जो होना है वो हो नहीं पाता। सवाल को विस्तृत रूप से पूछो, असली बात यह है कि जब जो होना चाहिए वो होता क्यों नहीं? जीवन में जो भी समुचित कर्म हैं वो मुझसे हो क्यों नहीं पाता?
वो हो इसीलिए नहीं पाता क्योंकि तुम उसमें अड़ंगा डाल कर बैठे हो। काम होने के लिए तैयार खड़ा है तुम बीच में अड़े हुए हो। तुम हट जाओ काम हो जाएगा।
तुम सवाल लिए बैठे हो। सवाल पूछे जाने के लिए तैयार खड़े हैं। सवाल का बस चले तो उछल कर के आए और अपने आप को प्रस्तुत कर दे। तुम अड़े बैठे हो कि मैं इन सवालों को बिना पूछे नहीं जाने दूंगा। तुम बीच में अपने विचार, अपने डर ले कर के खड़े हो गए हो। काम सब हों जाएँ ,सब हो जाए अगर उस सहजता पर बाँध ना बनाए जाएँ।



