ख़ुद को मज़बूत बनाओ, दूसरे की शिकायत करने से क्या लाभ है। दूसरे तो दूसरे हैं, अपने हिसाब से काम करेंगे।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक प्रश्न है मेरा। अभी हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने एक अनाउंसमेंट की है कि H-1B वीज़ा के लिए 100 थाउज़ंड डॉलर्स यानी 1 लाख डॉलर कंपनीज़ को अदा करने होंगे। तो अब मेरे कुछ फ़्रेंड्स हैं जो बैंगलोर और पुणे जैसे शहरों में हैं, तो वो काफ़ी चिंतित हैं। उनका सपना था कि वहाँ जाकर काम करेंगे। और जो अलरेडी बाक़ी लोग हैं जो वहाँ पर काम कर रहे हैं, तो वो उनसे भी ज़्यादा स्ट्रेस्ड हैं। तो अब इस पॉलिटिकल डिसीज़न को हमें किस दृष्टि से देखना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: मैं तो ये देख रहा हूँ कि ये सज्जन भी हमारी आईटी टीम से हैं। इनको इतनी चिंता क्यों हो रही है कि यूएस का H-1B अब 1 लाख डॉलर का हो गया। अरे भाई, उसका देश है, वो करेगा न। हम क्या बात करें इसमें? हम क्या बात करें? अमेरिका में उसकी अप्रूवल रेटिंग बहुत अच्छी चल रही है, लोकतांत्रिक प्रक्रिया से वो चुनकर आया है। लोगों ने वोट डाला भाई बाक़ायदा उसको, पहली नहीं दूसरी बार वो चुना गया है, हम होते कौन हैं शिकायत करने वाले। वो अपने नेशनल इंटरेस्ट का ख़्याल कर रहा है, सोवरेन कंट्री है।
सवाल ये होना चाहिए, कि हम क्या कर रहे हैं? हम क्यों किसी और पर आश्रित हैं? होना तो ये चाहिए था कि खलबली अमेरिका में मचती, उनकी कंपनियाँ रो रही होतीं। 72% H-1B




