राम को सोने से लगाव था? सोने की लंका, दुनिया का जो बड़े से बड़ा सोने का गढ़ हो सकता था, उसको छोड़कर आ गए। अगर अयोध्या छोड़कर चौदह वर्ष तक वन में भटक सकते हैं तो लंका क्या, इसको भी छोड़ देंगे और फिर वापस जाएँगे। ये राम थे। त्याग और राम समानार्थी शब्द हैं। क्यों न अपने घर से वो सब कुछ त्यागें, जिसकी आवश्यकता नहीं है, और फिर अपने मन से वो सब कुछ त्यागें जो व्यर्थ ही बैठा हुआ है? ऐसी दिवाली क्यों न मनाएँ?
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक बार आपसे ये समझना चाहता था कि धर्म और संस्कृति – इन दोनों चीज़ों में क्या संबंध है? साथ में इसको यदि मैं अभी के परिप्रेक्ष्य में देखूँ तो हम सभी ने सांस्कृतिक दिवाली देखी है जिसमें मिठाइयों का आदान-प्रदान चलता है, जिसमें नए कपड़े पहने जाते हैं, जिसमें ऐसी बहुत-सी चीज़ें की जाती हैं, जो हम सभी लोग पिछले बहुत सालों से कर रहे हैं। पर एक धार्मिक दिवाली कैसी होगी फिर?
आचार्य प्रशांत: अच्छा सवाल है, बढ़िया। हम इन चीज़ों पर चलते हैं, इन्हें अपने आम जीवन में जगह दिए रहते हैं, पर इन पर स्पष्टता से कभी विचार नहीं करते। हम इनकी परिभाषाओं पर नहीं जाते हैं — धर्म क्या है? संस्कृति क्या है?
संस्कृति क्या है?
जो आम आदमी के चलने-फिरने, सोने-उठने, आपस में बोल-व्यवहार करने का ढंग है, उसको संस्कृति कहते हैं, वही कल्चर है, ठीक है? या कि जैसी हमारी वास्तुकला भी होती है, जिस तरीके से हम अपनी इमारतें बनाते हैं, वो भी संस्कृति में ही आ जाता है। आप किसका कैसे अभिवादन करते हैं, ये भी संस्कृति में आ जाता है।




