ऐसे मिलते हैं श्रीकृष्ण || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मैंने आपका एक वीडियो देखा था जिसका शीर्षक था — ‘कर्ण के साथ छल क्यों हुआ?’ तो उसमें आपने बताया कि अगर आपके पास कोई गुण भी है और कौशल भी है, लेकिन अगर आप कृष्ण के विरोध में खड़े हैं तो आप हारोगे भी और मारे भी जाओगे।
तो कुरुक्षेत्र के मैदान में जो युद्ध हो रहा था, उसमें तो हम देख पा रहे हैं कि कौन विरोधी पक्ष से युद्ध कर रहे थे, कि वो सब कौन हैं जो कृष्ण के विरोध में खड़े हैं। लेकिन आज हम यह कैसे समझें कि कौन कृष्ण के विरोध में है? ये हम कैसे जानें?
आचार्य प्रशांत: गीता है न, तो कृष्ण आज भी हैं। जिन्हें गीता नही भाती, वो सब कृष्ण के विरोध में हैं।
अर्जुन की क्या पहचान है? आपके सामने बहुत सारे योद्धा खड़े हों, आपने उन्हें कभी देखा तो है नहीं आज तक। न आपने दुर्योधन को देखा, न किसी और को देखा है। आपके सामने ये सब खड़े हों, आप अर्जुन को पहचानेंगे कैसे? कैसे पहचानेंगे? एक ही पहचान है, जो तब थी वो आज भी है।
जिसके पास गीता है, वो कृष्ण हैं और जो गीता को सुनने को राज़ी है, वो अर्जुन है। बस!
तो आप तय कर लीजिए कि आपको उधर होना है या इधर होना है। उधर वालों की यही पहचान है, उनका नाम कुछ भी हो। जो पूरा कौरव पक्ष था उसमें भी बड़ी विविधता थी। इधर से, उधर से, पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण, हर तरफ़ से उसमें भी सब राजा लोग अपनी सेनाएँ, योद्धा सब ले के आए हुए थे। और उन सबमें एक चीज़ साझी थी, क्या? उन्हें कृष्ण से कोई लेना-देना नहीं।









