अध्यात्म कोई अलग विषय या पुरानी परंपरा नहीं, बल्कि स्वयं को जानने की सतत जागरूकता है। विज्ञान, चिकित्सा या एआई जैसे सभी क्षेत्र बाहरी ज्ञान से जुड़े हैं, जबकि अध्यात्म उस व्यक्ति को समझने की प्रक्रिया है जो इनका उपयोग करता है। यदि इंसान स्वयं को नहीं समझता, तो उसका ज्ञान दिशाहीन हो सकता है। सही समझ ही तकनीक और शक्ति को मानव कल्याण की दिशा देती है।
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प्रश्नकर्ता: सर, आज के जो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के टाइम में, जो चिकित्सा-विज्ञान है और स्पिरिचुअलिटी है, वो कैसे एक साथ चल सकते हैं? क्योंकि इनह्यूमन होने का आपने बताया भी था अभी डॉक्टर-वायलेंस पर टॉपिक पर, और बस यही क्वेश्चन है।
आचार्य प्रशांत: ये ऊपर लाइटें लटक रही हैं, ये और इस भवन की बुनियाद एक साथ कैसे चल सकते हैं? ये ऊपर से लटक रही हैं और बुनियाद तो ज़मीन की सतह के भी नीचे है। ये एक साथ कैसे चल सकते हैं? कैसे चल सकते हैं? यह एक साथ ही चलेंगे। और वह न हो तो यह लटकेगा नहीं, ये गिर जाएगा। और गिरेगा, तो बड़ा नाश करेगा, पता नहीं किसके सर पर गिर जाएगा।
अध्यात्म कोई क्षेत्र नहीं है, कोई काम नहीं है, कोई विषय या ऑब्जेक्ट नहीं है कि आप कहो कि एक ऑब्जेक्ट दूसरे ऑब्जेक्ट के साथ कैसे चलेगा। स्पिरिचुअलिटी माने विज़डम, माने आत्मज्ञान, वो आधार है जिसके बिना इंसान पगला है। उसके बाद वो वहाँ से ये लाइट्स नहीं लटकाएगा, वो वहाँ से गन्स लटकाएगा कि “मार देते हैं सबको।”




