आचार्य जी, आपका रोज़मर्रा का जीवन कैसा है? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2021)

प्रश्नकर्ता: ये प्रश्न आपके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा है। बहुत सारे लोगों को शायद ये उत्सुकता होगी, मुझे भी है कि हमने आपको हमेशा सत्र में देखा है और यहाँ पर कैंप में आते हैं, यहाँ पर देखा है, यूट्यूब पर देखा है लेकिन उसके बाद आप क्या करते हैं? एक आध्यात्मिक जीवन कैसा होता है? वो आपकी जो रोज़मर्रा का जीवन है, उपनिषदों की जो शिक्षाएँ हैं, वो अपने रोज़मर्रा के जीवन में कैसे उतरती हैं? मैं आपके रोज़मर्रा के जीवन के बारे में इसलिए जानना चाहता हूँ। धन्यवाद।
आचार्य प्रशांत: क्या करोगे जानकर? अच्छा नहीं लगेगा, व्यक्तिगत जीवन, व्यक्तिगत ज़्यादा कुछ है नहीं तो उसमें क्या बताऊँ तुमको? ‘काम के बाद मेरा जीवन कैसा होता है?’ काम खत्म होगा तो दूसरा जीवन होगा न, काम खत्म नहीं होता तो ऐसा कोई व्यक्तिगत जीवन वाकई नहीं है या है भी तो काम के साथ ही है। जिनके साथ काम है, उन्हीं के साथ जीवन बीत रहा तो ये जो यहाँ पर हो रहा है यही व्यक्तिगत जीवन है।
उसमें और तो मेरे पास ऐसे पूछोगे कि बताइए क्या है। तो मेरे पास बताने के लिए कुछ नहीं है। हाँ, इतना ज़रूर बता सकता हूँ, वही “नेति-नेति” के तौर पर कि आप आध्यात्मिक जीवन की जो छवियाँ रखते हैं, उन छवियों से तो बिलकुल भी, कम-से-कम मेरे जीवन का, कोई मेल नहीं है।
आप सोचते होंगे कि आध्यात्मिक आदमी बैठकर ध्यान कर रहा होता है या शान्ति से एक जगह बैठा है, पाठ वगैरह कर रहा है, जप रहा है और बड़ा एक वो नियमबद्ध जीवन जी रहा है। इतने बजे उसके सामने खाना आ ही जाता है, खा ही लेता है, फिर सो ही जाता है, फिर उठ ही जाता है, फिर नहाता है, फिर आधा-पौन घंटा पूजा-आरती में लगाता है, उसके बाद बैठकर के ऐसे देखता है (ऊपर देखते हुए) खुला आकाश, ऊँचे पहाड़। और कोई किताब, कविता वगैरह लिखता है। मेरे साथ तो ऐसा तो कुछ भी नहीं है।
इसीलिए मैं थोड़ा सतर्क भी रहता हूँ कि जो लोग जानते नहीं हैं, उनको बहुत आसानी से अपने व्यक्तिगत जीवन में झाँकने न दूँ। इसलिए नहीं कि मेरे पास छुपाने को कुछ है इसलिए कि तुम्हें अच्छा नहीं लगेगा। तुम्हारी धारणाएँ टूटेंगी, तुम परेशान हो जाओगे। तुम कहोगे, ‘इसमें वो सब कहाँ है? पूजा-पाठ कहाँ है? ध्यान कहाँ है? मौन कहाँ है? शान्ति कहाँ है? इनके पास तो तनाव ही तनाव है। आधे समय तो ये किसी को डाँट रहे होते हैं। ये कौनसा अध्यात्म है?’



