प्रश्नकर्ता: व्हाट इस सेल्फ रियलआईजेशन (आत्मबोध क्या है)?
आचार्य: यही कि सेल्फ है क्या। सेल्फ मतलब वो जो तलाशने की कोशिश में रहता है, वो जो इधर-उधर लगा रहता है, कभी ये जुगाड़ कभी ये जोड़-तोड़।
वो क्या चीज़ है? सेल्फ रियलाइजेशन का मतलब यह नहीं है कि सेल्फ अर्थात 'आत्म' कोई वस्तु है, कोई सिद्धांत है, कोई विचार है जिसका आपको ज्ञान हो जाएगा। सेल्फ रिअलाइजेशन जो होता है वो मात्र अहंता का होता है।
यहाँ पर सेल्फ को सत्य मत मान लीजिएगा। कोई सत्य को नहीं जान पाया है। सत्य को सत्य ही जानता है। आप और मैं होते कौन हैं सत्य को जानने वाले!
तो सेल्फ रिअलाइजेशन को यह मत मान लीजिएगा कि कोई है जो सत्य का जानकार हो जाएगा। कहीं से सत्य की जानकारी नहीं मिलने वाली। न कोई सत्य का जानकार होता है, न आज तक हुआ है, न आगे होगा।
अहंकार को जाना जा सकता है। अहंता का ज्ञान हो सकता है और अहंता का ज्ञान ही मंत्र बन जाता है। अहंता का ज्ञान ही आपको बोध में प्रविष्ट करा देता है।
आप जब जान जाते हो कि 'आप कौन हो' और 'आप कौन हो' से मेरा मतलब कोई विशिष्ट आपकी पहचान से नहीं है। 'आप कौन हो' से मतलब आप यही सब हो — आप, मैं — जो कुर्ता, टीशर्ट पहन कर बैठे हैं, जो कुर्सी पर बैठते हैं, जो खाते हैं, पीते हैं, जिनको अपेक्षाएँ होती हैं, जिनको बेचैनी होती है, जो उठते हैं, गिरते हैं, सोते हैं, जगते हैं, रिश्ते बनाते हैं, आगे बढ़ते हैं, पीछे हटते हैं—यही सब, हम लोग।




