आप आचार्य हैं तो आपको कोरोना क्यों हुआ? (देसी और अंग्रेज़ी टोने-टोटके) || आचार्य प्रशांत (2021)

आचार्य प्रशांत: कह रहे हैं, मेरा एक दोस्त है, वो प्राणिक हीलिंग करता है। और उसने मुझे अपनी कम्युनिटी (संघ) के बहुत-से लोगों को मिलवाया है, और उधर सभी लोग स्प्रिचुअल प्रैक्टिसेस (आध्यात्मिक क्रियाएँ) करते हैं। स्प्रिचुअल प्रैक्टिसेस के नाम बताता हूँ जो लिखे हैं इन्होंने — तंत्रा, टैरो, पास्ट लाइफ़ रिग्रेशन, वास्तु कंसल्टेन्सी, न्यूम्बरोलॉजी, थीटा हीलिंग, एंजिल थैरेपी, क्रिस्टल एनर्जी, साउण्ड हीलिंग, पामिस्ट्री और चक्रा थैरेपी; तो ये चल रहा है धन्धा।
ये स्प्रिचुअल प्रैक्टिसेस चलती हैं, और इसमें प्राणिक हीलिंग इनके मित्र करते हैं। तो बोल रहे हैं कि पहले तो ये सब मुझे बड़ा आकर्षक लगा और हमने बहुत बातें की। वो सब लोग ख़ासतौर पर एनर्जेटिक और पॉजीटिव (ऊर्जावान और सकारात्मक) थे, एनर्जेटिक थे, और पॉजीटिव थे। थीटा हीलिंग, एंजिल थैरेपी, तंत्रा, पामिस्ट्री, न्यूम्बरोलॉजी।
जब आपको कोरोना हुआ तो मैंने अपने प्राणिक हीलिंग वाले दोस्त को बताया, वो बोला, 'तू उस आचार्य की बातें सुनना छोड़ दे, जब वो ख़ुद अपनी बॉडी (शरीर) की एनर्जी (ऊर्जा) बढ़ाकर ठीक नहीं हो पाया, तो दूसरों को कैसे एडवाइज़ (सलाह) दे सकता है?' आचार्य जी, मेरे पास इस तर्क़ का कोई जबाव नहीं था। इसके बाद इन्होंने ऐसे बनाया (हाथ से उल्टा स्माइली का इशारा करते हुए) दो ऐसे डॉट और सी। समझ रहे हो, क्या? उल्टा स्माइली।
आचार्य जी, मेरे पास इस ज़बरदस्त तर्क़ का कोई जबाव ही नहीं था कि तुम्हारे आचार्य को कुछ आता जाता होता, तो अपनी एनर्जी बढ़ाकर के ख़ुद ही अपना निमोनिया नहीं ठीक कर लेता? ग़जब! तो आचार्य जी, आप अपना कोरोना ख़ुद क्यों नहीं ठीक कर पाये? ये सवाल आया है।



