
Reeta Gautam
सही बात है । देखना तो तभी हुआ जब जिसको देखा वो बदल जाये । मै खुद को जो समझती थी सब झूठ हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि मै एक मोटी किताब हूं जिसके पन्ने पलटते जा रहे हैं और पहले के पन्ने झूठे होते जा रहे हैं। 🙏🙏
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सही बात है । देखना तो तभी हुआ जब जिसको देखा वो बदल जाये । मै खुद को जो समझती थी सब झूठ हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि मै एक मोटी किताब हूं जिसके पन्ने पलटते जा रहे हैं और पहले के पन्ने झूठे होते जा रहे हैं। 🙏🙏
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