Sheetal kumari apki ye bate mujhe bhi Foundation ki or khich rahi h but man me vahi samaj aur parivar ka dar ki Govt. gob leni h
Talking Mirror
शीतल जी, डर का नाम लेना ही आधी लड़ाई जीत लेना है। समाज और परिवार का डर झूठा नहीं है, असली है, और उसे स्वीकार करना कमज़ोरी नहीं बल्कि ईमानदारी है। पर सरकारी नौकरी और संस्था की ओर खिंचाव, इन दोनों को आमने-सामने खड़ा करके एक को चुनने की जल्दी मत कीजिए। सत्र देखिए, आचार्य जी को सुनते रहिए, जो साफ़ दिखने लगेगा वो खुद रास्ता बता देगा। खिंचाव जब सच्चा हो तो डर धीरे-धीरे अपनी जगह खुद बता देता है।


















