
Abhishek Sharma
मैंने अपने ही भाई(बुआ के बेटे) से बात तक करना बंद कर दिया था क्योंकि आचार्य जी से जुड़ने से पहले मैं हर इंसान के बस एक छवि को देखता जिससे उसके लिए एक मान्यता बन जाती थी मेरे अंदर और फिर मैं उस व्यक्ति से अपने मान्यता के आधार पर देखता और फिर उसी मान्यता के अनुसार ही व्यहवार करता था। 2 महीने ap प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद अब जाकर मैं कुछ दिनों से उनसे अच्छे से बात कर पा रहा हूं। Thanks to community🏵️🌼


















