
Khushi
अभी तक यही सोचकर चल रही थी कि मुझे लगता था मेरे लिए मेरी दुनिया घर तक ही है पर आचार्य जी ने बताया कि दुनिया घर तक ही नहीं है उसके बाहर भी बहुत कुछ है। करने , समझने, देखने, सुनने के लिए।
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अभी तक यही सोचकर चल रही थी कि मुझे लगता था मेरे लिए मेरी दुनिया घर तक ही है पर आचार्य जी ने बताया कि दुनिया घर तक ही नहीं है उसके बाहर भी बहुत कुछ है। करने , समझने, देखने, सुनने के लिए।
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