
🔸भारत और नेपाल में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन 25–27 सितंबर 2026 उत्तर प्रदेश में सामान्य से बहुत अधिक बारिश हुई। भारत में 56 लोगों की मृत्यु हुई और नेपाल में 14 लोगों की जान गई तथा कई लोग लापता हुए। नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ा। हमसे संबंध: भारत में रहने के कारण इसका सीधा संबंध हमारी खेती, खाद्य आपूर्ति, सड़क, घरों और जनजीवन से है। हिमालयी क्षेत्रों में भूमि उपयोग, जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझना भी जरूरी है। 🔸थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में बाढ़ 26 सितंबर 2026 बैंकॉक में 48 घंटों में लगभग 300 मिलीमीटर बारिश हुई। कई सड़कें पानी में डूब गईं और कुछ इलाकों में लोगों को कमर तक पानी से होकर गुजरना पड़ा। प्रशासन ने आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर राहत व्यवस्था शुरू की। हमसे संबंध: तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जल निकासी की कमी और अत्यधिक वर्षा का मेल बड़े शहरों को असुरक्षित बना सकता है। भारत के अहमदाबाद, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों के लिए भी यह एक महत्त्वपूर्ण सबक है। निष्कर्ष जलवायु संबंधी घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध कैसा होना चाहिए। हम प्रकृति से अलग नहीं हैं। हमारी जीवनशैली, ऊर्जा का उपयोग, उपभोग की आदतें और विकास का मॉडल पूरी पृथ्वी की जलवायु को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए जलवायु संकट का समाधान केवल आपदाओं के बाद राहत पहुँचाना नहीं है, बल्कि उन मानवीय गतिविधियों और व्यवस्थाओं पर भी विचार करना है जो इस संकट को बढ़ाती हैं।


















