
सही कहा जो मान्यता हमारी मान्यता से मेल नहीं खाती हम अक्सर कह देते हैं कि यह कैसी मान्यता है ?हमारा अहंकार उसे स्वीकृति नहीं देता।लेकिन दूसरी तरफ हम अपनी मान्यताओं को भी बिना परखे ही बस पालन करते रहते हैं ,चाहे वह दिखाई देने में छोटे रूप में हो किंतु है उनका हमारे जीवन में प्रभाव पड़े व्यापक स्तर पर पड़ता है। अधूरे ज्ञान से कुछ भी करो घातक ही होता है। किसी भी अंधविश्वास का पालन करना जैसे कि इस वीडियो में शारीरिक क्षति से शोक व्यक्त करने की परंपरा है यह सिर्फ और सिर्फ हमारे अहंकार को बढ़ाने का काम करता है ।🤯 अगर हम सिर्फ अज्ञानी हो तो भी नुकसान कुछ कम हो लेकिन हम तो अधूरे ज्ञानी(मुर्ख)है जो जितना जान लिया बस उसी पर चलते हैं। और जीवन व्यर्थ गंवाते है।⛓️⛓️ उससे भी आगे जिज्ञासा करने को ही आत्मज्ञान कहते हैं और जब आत्मज्ञान से आत्म अवलोकन किया जाता है खुद को जानने की प्रक्रिया शुरू होती है तब अहंकार क्षीण होता है और इसी क्षीण अहंकार को आत्मोन्मुखी अहंकार कहते हैं और यही कृष्णत्व की राह है। इसी राह पर चलकर हम बंधनों से मुक्त हो सकते हैं।⛓️💥⛓️💥


















