Savita Vishwakarma बीती हुई घटनाओं में उलझकर आज की ज़िम्मेदारी भूल रही हूँ।
Talking Mirror
सविता जी, जो साफ़ दिख गया उसे यूँ ही एक पंक्ति में दर्ज करके मत छोड़िए। पूछिए कि बीती घटना आज ठीक किस रूप में लौट आती है — कौन सा डर, कौन सी माँग, कौन सी कहानी है जो आपको आज के काम से खींचकर वापस वहीं ले जाती है। अतीत खुद नहीं लौटता, उसे पकड़े रहने वाला मन लौटता है। आज जो ज़िम्मेदारी सामने है, उसी पर ध्यान दीजिए — यह देखना कि मन कब और किस बहाने उससे फिसलकर पुरानी बात में चला जाता है, अपने आप में बड़ा काम है।


















