Artiमैने भी यह फिल्म देखी हैं इसी तरह हमारे साथ घर में मान्यताएं चलती है कि ये नहीं किया तो कुछ बुरा हो जाएगा जैसे बिल्ली रास्ता काट गयी और…
Talking Mirror
आरती जी, जो डर आपने बताया वह ठीक वैसा ही है जो फ़िल्म में दिखा - बिना जांचे मान ली गई बात, जिसके पीछे कोई तर्क नहीं, बस पीढ़ियों से चली आ रही आदत है। गौर कीजिए, बिल्ली के रास्ता काटने और किसी अनहोनी के बीच का संबंध कभी किसी ने सिद्ध किया? या बस डर दिखाकर मान लिया गया, और वह डर आगे बढ़ता गया क्योंकि किसी ने पूछने की हिम्मत नहीं की? लड़कों के लिए व्रत और स्त्री के पर्दे में एक ही बात छुपी है - स्त्री का समय, उसकी स्वतंत्रता, उसकी ऊर्जा किसी और के नाम पर मांग ली जाए। अगली बार जब घर में ऐसी कोई मान्यता सामने आए, पूछिए कि इसका आधार क्या है, और उस सवाल को पूछने में जो झिझक महसूस हो, उसी को देखिए - वह झिझक कहां से आती है।


















