
Homendra kumar
गाइड फिल्म में देव आनंद जी का पात्र मुझे इतना अच्छा लगा कि वह मेरे अपने जीवन से जुड़ता चला गया। अंत में वे संत बनते हैं और उनका अहंकार घुट घुट कर मरने लगता है। उस स्थान की कामना भी मैं करने लगा। वह पात्र मुझे इतना पसंद आया कि वह मेरे दिमाग में घर कर गया और मैं दिन भर उसके बारे सोचता रहा।


















