
Meena Kumari Meena
मैं तो यही समझ पायी हूं शायद मैं अपनी धारणा, मान्यता से गलत भी हो सकती हूं क्योंकि पहले आचार्य जी से जुड़े नहीं थे तो कौन सही रास्ता बताता । अब तो समझ आ रहा है कि शादी करना , बच्चे करना जरूरी था ही नहीं जीवन में । अपना जीवन सही कार्य में लगाकर भी पूरा किया जा सकता था। समाज,परिवार की मान्यता परम्परा से अलग अपनी स्वतंत्रता का जीवन जिया जा सकता था ।अब तो समाज परिवार की झूठी मान मर्यादा का पालन करना जरूरी सा लगता है। लेकिन मैं समझने का प्रयास कर रही हूं कैसे लोकधर्म से ऊपर अपने जीवन को बदला जा सकता है। यह अब आचार्य जी से जोड़ने के बाद समझ आ रहा है


















