Poojaआप बताइए, आपके जीवन के बड़े फैसले आपकी समझ से आते हैं या लोगों की अपेक्षाओं से?
मेरे जीवन के बड़े फैसले ज्यादा तर लोगो की अपेक्षाओं से …
पूजा जी, जो साफ़ देख पा रही हैं कि पहले फैसले ज़्यादातर दूसरों की अपेक्षाओं से आते थे, वह देखना ही असली शुरुआत है। अब कोशिश को रोज़मर्रा में परखिए: अगली बार कोई बड़ा फैसला सामने आए, तो खुद से पूछिए कि यह विचार कहाँ से उठा है, किसी की स्वीकृति पाने से या वाकई अपनी स्पष्टता से। जो में भी वही छटपटाहट दिखती है, जहाँ वह समाज की भूमिका से आज़ाद होना चाहती है पर भीतर अकेलापन उसे डिगा देता है। आज़ादी वहीं पक्की होती है जब फैसला डर या अस्वीकृति के भय से नहीं, बल्कि समझ से निकले, चाहे नतीजा जैसा भी हो। यह काम एक बार का नहीं है, रोज़ का है। आचार्य प्रशांत जी के सत्रों से जुड़े रहिए, वहाँ यह देखना और साफ़ होता जाएगा। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















