Jyoti kumariइस पोस्ट को पढ़कर यह समझ में आया कि पशमीना शॉल, चमड़े की वस्तुएं इस्तेमाल करना भी एक मांसाहार का ही रूप है क्योंकि मांसाहार की पूर्ति ह…
Talking Mirror
ज्योति जी, आपने लिखा कि अब जब भी पश्मीना या चमड़ा देखेंगी, आपको हिंसा याद आएगी। यह याद रहना ही असली कसौटी है, दुकान में, किसी के गिफ़्ट देने पर, किसी मौके पर जब वह चीज़ सुंदर और आकर्षक लगे, तब भी यह याद टिकती है या सिर्फ़ इस पोस्ट को पढ़ते वक़्त की स्याही है। बकरी की जांच कंघी और नोच में होती है, आपकी जांच उस पल में होगी जब चीज़ फिर से लुभाएगी। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















