
वाकई में यह बात बिल्कुल 100% सच है कि छोटी सी लड़कियों को यह बोला जाता है कि: - तुम्हें यह नहीं करना, वो नहीं करना, ऐसे करना, वैसे करना - बड़ों के सामने नजरेनीचे रखना - बalki उनकी बातों को ध्यान से सुनना, मानना - कपड़ों के आधार पर, reason के आधार पर, बातचीत करने के आधार पर सभी में एक दिशा-निर्देश रहता है, जो कि शुरू से हमें अपने द्वारा रखना पड़ता है और उस उच्चतम संभावना तक नहीं पहुंच पाती, जहां हमें पहुंचना चाहिए। इसलिए यह चीज़ आज के समय में लड़कियों के लिए बहुत सी जागरूकताएँ आचार्य जी के माध्यम से आई हैं। उन्होंने नहीं कह सकते कि लड़कियों को और लड़कों को एक समान मानने की पहल की है। उन्होंने कहा कि gender में फर्क नहीं होना चाहिए। चेतना वो महत्वपूर्ण चेतना है। सबसे बड़ी बात यह है कि हम stri को देह नहीं बरन चेतना मानें। चेतना मानने से सारी अलगाव-वाद दृष्टियाँ समाप्त हो जाती हैं और एक सोच उचित सम्मान की ओर जाती है। धन्यवाद acharya जी। 🙏❤️


















