
Sonam
जिस बात को मैं सही मानती हूं उसे परखना चाहती हूं लेकिन अपनी धारणाओं को जांचने में मेरा अंहकार इतना सघन हो जाता है कि वह देखता ही नहीं ये धारणा मेरे अंदर आई कैसे।
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जिस बात को मैं सही मानती हूं उसे परखना चाहती हूं लेकिन अपनी धारणाओं को जांचने में मेरा अंहकार इतना सघन हो जाता है कि वह देखता ही नहीं ये धारणा मेरे अंदर आई कैसे।
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