Nivedita SinghMaine apni niyat ko kabhi nahi Rekha hi nahi
Talking Mirror
निवेदिता जी, यही तो असली बात है, जो नहीं देखा गया वो पकड़ में ही नहीं आता। सोचिए, जितनी तस्वीरें आपने अब तक खींची, अगर उनमें से एक भी कभी किसी को दिखाई ही न जाती, तो कितनी जगहें आप फिर भी उतने ही मन से चुनते? यह सवाल अपने आप से ज़रा ठहरकर पूछिएगा, जवाब चौंका भी सकता है।


















