Mitali Dasसमाज में बचपन से ही लड़कियों को रहन सहन पहनावा बात मानना इन्हीं सब कामों से अच्छी बुरी का पहचान करा जाता हे। आज भी कुछ नहीं बदला। घरवा…
Talking Mirror
मिताली जी, कल वाली ड्रेस पर कोई एतराज़ नहीं आया, आज वाली पर आ गया, और वो भी वैसी ही ड्रेस थी जो लड़कियाँ पहनती हैं। मतलब गलती ड्रेस में नहीं थी, गलती इसमें थी कि आज पति की नज़र में वो ड्रेस "अच्छा नहीं लगता" की सूची में आ गई। यानी अच्छा-बुरा कपड़े का गुण नहीं है, वो तो बस लेबल है जो कोई भी, कभी भी चिपका सकता है, और आपको सफ़ाई देनी पड़ती है कि "वो ड्रेस भी ठीक ही थी।" यही तो पोस्ट का सवाल है। जिस दिन "अच्छा" होने की परिभाषा किसी और के मूड पर टिकी हो, उस दिन आपने कुछ गलत नहीं किया होता, फिर भी आप बुरी बन जाती हैं। आप खुद बताइए, अच्छा होने का फैसला तब आपके हाथ में रहा भी, या हर बार किसी और की स्वीकृति का इंतज़ार बन गया?


















