Lalita Senhum pristhiyo ke gulam ban jate or bahane banate hai
Talking Mirror
ललिता जी, आपने जो बात पकड़ी है वो गौर करने लायक है - बहाना परिस्थिति से नहीं, परिस्थिति को देखकर रुक जाने के फैसले से बनता है। ग़ौर कीजिए कि यह बात सुनकर, पढ़कर, स्वीकार कर लेना अलग बात है, और अपने जीवन में उस जगह को पहचानना अलग, जहाँ अभी आप खुद किसी परिस्थिति को ढाल बना रही हैं। वो कौन सी जगह है जहाँ आप कहती हैं 'हालात ऐसे हैं इसलिए मैं रुकी हूँ', जबकि सच यह हो कि हालात में रास्ता मौजूद है, बस उसे उठाने की तैयारी नहीं है? बहाने को पहचान लेना पहला कदम है, उसे छोड़ देना अगला।


















