
🪞 अहंकार को तथ्य से उतना मतलब नहीं होता, जितना अपने पक्ष को मजबूत करने से। एक असाधारण घटना हुई। फिर अहंकार ने उसमें वही अर्थ खोज लिया, जिससे उसकी पुरानी मान्यता और मजबूत हो जाए। ऐसा ही12/6/2025 को हुए अहमदाबाद प्लेन क्रैश में एक व्यक्ति के बच जाने पर अहंकार ने तथ्यों को अपनी मान्यता के अनुसार ही अर्थ दिया, जो कि गलत धारणा है। अपने आसपास से जुड़ी ऐसी घटनाएँ बताइए, जहाँ लोगों ने अपनी ही मान्यताओं की पुष्टि के लिए किसी एक घटना को असाधारण बना दिया। -- मैं पिछले सप्ताह अमृतसर गई, वहाँ Wagah Border गई, जहाँ मैंने देखा कि कैसे मेरे राष्ट्र की सेना के नौजवान और पड़ोसी देश की सेना के नौजवान ऐसा प्रदर्शन कर रहे थे/ हैं, जिससे मेरे राष्ट्र में और पड़ोसी राष्ट्र में देश भक्ति का नहीं वरन कट्टरता का संचार हो रहा था/है। यही वे प्रतिदिन स्वस्थ मानसिकता के साथ करें तो उससे दोनों राष्ट्रों के साथ -साथ संपूर्ण विश्व भी, प्रकृति भी सहजता की तरफ़ आगे बढ़े। पर अहंकार ही है जो अपनी ही मान्यताओं की पुष्टि के लिए किसी एक साधारण घटना को असाधारण बना देता है। और अहंकार ही है जो अपनी ही मान्यताओं की पुष्टि के लिए किसी एक असाधारण घटना को साधारण बना कर, उसका रूप जो बहुत सुंदर हो सकता था, विकृत कर देता है, और उसे यह अहसास भी तभी होता है जब वो व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठ कर आत्मज्ञान की राह पर चलता है।


















