Raghuraj Patidarजो पैसा मुझे घर से खाने पीने के लिए मिलता है उसे में अपने खाने में व कॉलेज जाने के लिए भाड़े व संस्था के डोनेशन में उपयोग करता हूं।
रिश्…
Talking Mirror
रघुराज जी, एक बात गौर करने वाली है, खाने-पीने के पैसे में से भी आप संस्था को दान निकाल लेते हैं, कोई अलग बचा हुआ या एक्स्ट्रा हिस्सा नहीं, सीधे ज़रूरत वाले हिस्से से। बाकी सब लेबल बदलते रहें, ट्रेवलिंग हो या रिचार्ज, यह एक चीज़ अपनी जगह टिकी है। यही असली मेंटल अकाउंटिंग है, जहाँ दान किसी बचत का हिस्सा नहीं बल्कि प्राथमिकता है।


















