Shilpee मनुष्य अपने भीतर उस संघर्ष को शायद इसलिए ढो रहा है, जिसके लिए उसे लगातार नए हथियार बनाने पड़ रहे हैं ,
क्यूँ कि वह अपने अहंकार को किसी…
Shilpee जी, आपने जो लिखा है कि "देखो तुममें हममें अंतर क्या है", उसमें एक बात छुपी है। अंतर दिखाने की ज़रूरत तभी पड़ती है जब अपना कुछ होता ही नहीं। अहंकार के पास अपना कुछ नहीं होता, सब माँगा हुआ होता है, इसीलिए उसे हर बार दूसरे के सामने कुछ नया रखकर साबित करना पड़ता है कि वह अलग है और बड़ा है। हथियार इसी माँगे हुए सामान की सबसे महँगी, सबसे चमकदार दुकान है। अब इसी बात को ज़रा अपने रोज़ के जीवन पर रखकर देखिए। रसोई से दफ़्तर तक, घर की बहस से परिवार की बैठक तक, वही छोटा हथियार कहाँ-कहाँ चल रहा है, जहाँ आप भी "मैं ठीक हूँ" साबित कर रही हैं? ऐसी जगहों को पकड़ने के लिए आचार्य जी के सत्रों में उतरना और इस समुदाय में लिखते रहना अच्छा रास्ता है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















