
1️⃣ चेतना एक द्वैतवादी परिघटना है, जिसके एक छोर पर अहंकार और दूसरे छोर पर विषय होता है। इस संरचना के बिना चेतना नहीं है। अहंकार के विगलन के बाद वैसी चेतना भी समाप्त हो जाती है, जैसी अहंकार उसे जानता है। 2️⃣ तंत्रिका विज्ञान चेतना को मुख्यत: मस्तिष्क और जैविक गतिविधियों से उत्पन्न अनुभव या जागरूकता के रूप में देखता है। वही AP framework चेतना को केवल मस्तिष्क की उपज मानकर नहीं रुकता, बल्कि यह पूछता है अनुभव करने वाला ’मैं’ कौन है और वह किस केंद्र से देख रहा है। यानी विज्ञान मुख्यत: चेतना के न्यूरल आधार को देखता है, जबकि AP framework अहंकार और उसके अनुभव संरचना को देखता है। 3️⃣ मैं अपनी ज़िंदगी में आज तक जो भी फैसले लेती थी, मुझे लगता था मैं अपनी इच्छा से ले रही हूं लेकिन जब देखती हूं तो पता चलता है कि ज्यादातर फ़ैसले तो मैंने समाज के हिसाब से ही लिए हैं। समझ अब आता है कि इसे स्वतंत्र कहना सही नहीं है। 4️⃣ क्योंकि हमें सबसे पहले इसी दुख को देखना है, अहंकार भी एक मान्यता है, लेकिन दुख प्रत्यक्ष अनुभव है। एक दुख हमारी अपेक्षाओं, मान्यताओं और उनसे चिपकने से पैदा होता है, इसलिए भी से जाँच शुरू करना चाहिए।


















